Untitled by Kaka Hathrasi हमने पूछा- ‘अनेकता में एकता' आप नारा लगाते हैं, कृपया बताएँ इसके क्रियान्वयन-हेतु आपने अब तक क्या किया ?' वे बोले- ‘अभी तो इसके प्रथम चरण से गुज़र रहे हैं, सर्वप्रथम अनेकता लाने का प्रयास कर रहे हैं। Rate this poem: Report SPAM Reviews Post review No reviews yet. Report violation Log in or register to post comments